Short Article on 'Air Pollution' in Hindi | 'Vayu Pradushan' par Lekh (500 Words)

Thursday, March 1, 2018

वायु प्रदूषण

किसी भी प्रकार के हानिकारक पदार्थ जैसे रसायन, सूक्ष्म पदार्थ, या जैविक पदार्थ को वातावरण में मिलाना 'वायु प्रदूषण' कहलाता है। वायु प्रदूषण से ताजी हवा, मनुष्य का स्वास्थ्य, जीवन की गुणवत्ता आदि बड़े स्तर पर प्रभावित होती हैं। इस तरह की प्रदूषित वायु केवल एक स्थान पर नहीं रहती, बल्कि धीरे-धीरे समस्त वातावरण में फैल जाती है और पूरे विश्व के लोगों के जीवन को प्रभावित करती है।

वायु प्रदूषण का सबसे अधिक प्रकोप महानगरों पर हुआ है। इसका कारण है बढ़ता हुआ ओद्योगीकरण। गत बीस-पच्चीस वर्षों में भारत के प्रत्येक नगर में कारखानों की जितनी तेज़ी से वृद्धि हुई है उससे वायुमंडल पर बहुत प्रभाव पड़ा है क्योंकि इन कारखानों की चिमनियों से चौबीसो घंटे निकलने वाले धुएँ ने सारे वातावरण को विषाक्त बना दिया है।

वायु प्रदूषण कपड़ा बनाने के कारखानों, रासायनिक उद्योगों, तेल शोधक कारखानों, चीनी बनाने के कारखानों, धातुकर्म एवं गत्ता निर्माण करने वाले कारखानों से सर्वाधिक होता है। इन कारखानों से कार्बन डाई आक्साइड, कार्बन मोनो आक्साइड, सल्फर, सीसा, बेरेलियम, जिंक, कैडमियम, पारा तथा धूल वायुमण्डल में पहुंचती है, जिससे वायु प्रदूषण होता है।

वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण सड़कों पर चलने वाले वाहनों की संख्या में तेज़ी से होने वाली वृद्धि भी है। इन वाहनों के धुएँ से निकलने वाली 'कार्बन मोनो ऑक्साइड' गैस के कारण आज ना जाने कितने प्रकार की साँस और फेफड़ों की बीमारियाँ आम बात हो गई हैं।

बढ़ती हुई जनसंख्या, लोगों का काम की तलाश में गाँवों से शहरों की ओर भागना भी वायु-प्रदूषण के लिए अप्रत्यक्ष रूप से उत्तरदायी है। शहरों की बढ़ती जनसंख्या के लिए आवास की सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए वृक्षों और वनों को भी निरंतर काटा जा रहा है।

भारत में भी वायु प्रदूषण की स्थिति चिंताजनक है। यहां के वायुमण्डल में सल्फर डाई आक्साइड एवं धूल कणों की मात्रा बहुत अधिक है। भारत के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में दिल्ली, अहमदाबाद, मुंबई, चेन्नई, कानपुर आदि हैं। सार्वजनिक और व्यक्तिगत शौचालयो की समुचित सफाई न होने से भी क्षेत्र विशेष की वायु प्रदूषित होती है। मृत जानवरों की खाल निकालकर शेष भाग को खुले में छोड़ देने के बाद जब ये शव सड़ते हैं तो अत्यधिक दुर्गन्ध निकलती है, जो वायु प्रदूषण का कारण बनती है।

वायु प्रदूषण का मानव स्वास्थ्य पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। इससे मानव का श्वसन तंत्र प्रभावित होता है। वायु प्रदूषण से दमा, ब्रोंकाइटिस, सिरदर्द, फेफड़े का कैंसर, खांसी, आंखों में जलन, गले का दर्द, निमोनिया, हृदय रोग, उल्टी और जुकाम आदि रोग हो सकते है। सल्फर डाई आक्साइड से एम्फायसीमा नामक रोग होता है। वायु प्रदूषण का प्रभाव जीव-जन्तुओं पर भी गम्भीर रूप से पड़ता हैं। इसकी वजह से जीव-जन्तुओं का श्वसन तंत्र एवं केंद्रीय तंत्रिका तंत्र प्रभावित होता है।

आज के विज्ञान-युग में प्रदूषण की समस्या एक बड़ी चुनौती बनकर खड़ी है। उपयोगितावाद के हाथों प्राकृतिक साधनों का अंधा-धुंध दोहन हुआ है। परिणामसवरूप वातावरण में निरंतर प्रदूषण बढ़ा है। वैसे तो सभी प्रकार के प्रदूषणों का प्रभाव ख़राब होता है किन्तु वायु प्रदूषण का प्रभाव क्षेत्र अत्यधिक व्यापक है। पर्यावरण की सुरक्षा के लिए हमें अधिक से अधिक वृक्ष लगाने चाहिए।  


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