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Short Essay on 'Id-ul-Fitr' in Hindi | 'Eid' par Nibandh (301 Words)

ईद

'ईद-उल-फितर' या 'ईद' मुसलमानों के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है। यह त्योहार दुनिया भर के मुसलमानों का सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक त्योहार है। यह त्योहार भारत सहित पूरी दुनिया में बहुत ही धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। ईद का त्योहार रमजान के पवित्र महीने के बाद मनाया जाता है।

मुसलमानों के लिए रमजान के दिनों का बहुत महत्त्व है। इस दौरान वे दिन भर पूर्ण उपवास रखते हैं। पानी पीना भी वर्जित होता है। शाम को नमाज़ अदा कर ही भोजन ग्रहण करते हैं। रमजान के महीने के अंतिम दिन जब आकाश में चाँद दिखाई देता है तो उसके दूसरे दिन ईद मनाई जाती है।

ईद का त्योहार मनाने की तैयारी पहले से ही आरम्भ कर दी जाती है। बच्चे, युवा, वृद्ध सभी उत्साहित दिखाई देते हैं। बाज़ारों में भीड़ बढ़ जाती है। अमीर-गरीब सभी नए वस्त्र, जूते-चप्पल, उपहार आदि खरीदने में व्यस्त हो जाते हैं।

ईद के दिन सुबह से ही बच्चे, युवा, वृद्ध सभी विशेष प्रकार के वस्त्र पहनकर, सर पर टोपी लगाकर ईदगाह में जमा होने लगते हैं। वहाँ सभी पंक्तिबद्ध होकर विशेष नमाज़ अदा करते हैं। देश की सभी प्रमुख मस्जिदों में भी ऐसा ही दृश्य देखा जा सकता है। सभी आपसी भेद-भाव भूलकर गले मिलते हैं और एक-दूसरे को ईद की बधाई देते हैं।

ईद के दिन मुसलमानों के घर मीठी सेवईं बनती है। इसके अतिरिक्त अनेक प्रकार के व्यंजन भी तैयार किये जाते हैं। लोग अपने सगे सम्बन्धियों के घर जाकर उन्हें ईद की मुबारकबाद देते हैं। रात में मस्जिदों पर रोशनी की जाती है।

ईद आपसी मिलन और भाई-चारे का त्योहार है। यह त्योहार भारत की बहुआयामी संस्कृति का प्रतीक है। इस त्योहार पर भारत के सभी समुदायों के लोग बहुत खुश होते हैं। ईद का त्योहार सभी के लिए खुशियाँ लेकर आता है। यह त्योहार दया, परोपकार, उदारता, भाई-चारा आदि मानवीय भावनाओं से युक्त होता है।

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Short Paragraph on 'Sharad Purnima' in Hindi (150 Words)

शरद पूर्णिमा

'शरद पूर्णिमा' हिन्दुओं का प्रसिद्द त्यौहार है। शरदीय नवरात्र के बाद पड़ने वाली पूर्णिमा को 'शरद पूर्णिमा' कहा जाता है। मान्यता है कि आश्विन शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली पूर्णिमा के दिन चंद्रमा से अमृत वर्षा होती है। इस दिन रात में खीर बनाकर खुले आसमान के नीचे रखकर सुबह उसका सेवन करने से सभी रोग दूर हो जाते हैं। शरद पूर्णिमा के दिन सायंकाल लक्ष्मी पूजन होता है। नवरात्र में मां दुर्गा की स्तुति के बाद अगले वर्ष आर्थिक सुदृढ़ता की कामना के लिए शरद पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी की पूजा होती है। मां दुर्गा की प्रतिमा बनाने वाला कारीगर ही लक्ष्मी की प्रतिमा बनाता है। पुरानी लक्ष्मी प्रतिमा का विसर्जन करके नई प्रतिमा को अगले वर्ष तक संभालकर रखा जाता है। मां लक्ष्मी को पांच तरह के फल व् सब्जियों के साथ नारियल भी अर्पित किया जाता है। मंदिरों में भी विशेष पूजा-अर्चना होती है। 
 

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Short Biography of 'Guru Nanak Dev' in Hindi | 'Guru Nanak Dev' ki Jivani (160 Words)

गुरू नानक देव

'गुरू नानक देव' का जन्म 15 अप्रैल, 1469 को तलवंडी नामक स्थान में हुआ था। इनके पिता कल्यानचंद एक किसान थे। 16 वर्ष की अवस्था में इनका विवाह हुआ। श्रीचंद और लक्ष्मीचंद नाम के दो पुत्र भी इन्हें हुए।

गुरू नानक सिखों के प्रथम गुरु (आदि गुरु) है। इनके अनुयायी इन्हें गुरु नानक, बाबा नानक और नानकशाह नामों से संबोधित करते हैं। तलवंडी का नाम आगे चलकर नानक के नाम पर ननकाना पड़ गया।

गुरु नानक में बचपन से प्रखर बुद्धि के लक्षण दिखाई देने लगे थे। पढ़ने लिखने में इनका मन नहीं लगा। 7- 8 साल की उम्र में स्कूल छूट गया और सारा समय वे आध्यात्मिक चिंतन और सत्संग में व्यतीत करने लगे। उनका देहांत 70 वर्ष की उम्र में 22 सितम्बर, 1539 ई० में हुआ।

गुरु नानक देव जी का जन्मदिन 'गुरुपरब' के नाम से प्रति वर्ष मनाया जाता है। उनकी जयंती हिन्दू कैलेण्डर के अनुसार कार्तिक माह की पूर्णिमा को मनाई जाती है जिसे 'कार्तिक पूर्णिमा' भी कहते हैं। यह सिखों का प्रमुख त्यौहार है। 

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