Short Biography of 'Rash Bihari Bose' in Hindi | 'Rash Bihari Bose' ki Jivani (380 Words)

Sunday, April 15, 2018

रास बिहारी बोस

'रास बिहारी बोस' का जन्म 25 मई 1886 को बंगाल के बर्धमान जिले के सुबालदह नामक गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम बिनोद बिहारी बोस था। उनकी माता का नाम भुबनेश्वरी देवी था। जब बालक रास बिहारी मात्र तीन साल के थे तब उनकी मां का देहांत हो गया, जिसके बाद उनका पालन–पोषण उनकी मामी तिनकोरी दासी ने किया।

रास बिहारी बोस की प्रारंभिक शिक्षा चन्दन नगर में हुई, जहाँ उनके पिता कार्यरत थे। आगे की शिक्षा उन्होंने चन्दन नगर के डुप्लेक्स कॉलेज से ग्रहण की। चन्दन नगर उन दिनों फ्रांसीसियों के अधीन था। अपने शिक्षक चारू चांद से उन्हें क्रांति की प्रेरणा मिली। उन्होंने बाद में चिकित्सा शास्त्र और इंजीनियरिंग की पढ़ाई फ्रांस और जर्मनी से की।

रास बिहारी बोस एक भारतीय क्रांतिकारी नेता थे जिन्होने अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध ‘गदर’ एवं ‘आजाद हिन्द फौज’ के संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने न सिर्फ देश के अन्दर बल्कि दूसरे देशों में भी रहकर अंग्रेज सरकार के विरुद्ध क्रांतिकारी गतिविधियों का संचालन किया और पूरी उम्र भारत को स्वतन्त्रता दिलाने का प्रयास करते रहे।

प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान युगांतर के कई नेताओं ने ‘सशस्त्र क्रांति’ की योजना बनाई, जिसमें रास बिहारी बोस की प्रमुख भूमिका थी। उन्होंने फरवरी 1915 में अनेक भरोसेमंद क्रांतिकारियों की सेना में घुसपैठ कराने की कोशिश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके क्रांतिकारी कार्यों का एक प्रमुख केंद्र वाराणसी रहा, जहाँ से उन्होंने गुप्त रूप से क्रांतिकारी आंदोलनों का संचालन किया। 

जापान में उन्होंने अपने जापानी  क्रांतिकारी मित्रों के साथ मिलकर देश की स्वतन्त्रता के लिये निरन्तर प्रयास किया। जापान में उन्होंने अंग्रेजी अध्यापन, लेखन और पत्रकारिता का कार्य किया। वहाँ पर उन्होंने ‘न्यू एशिया’ नाम से एक समाचार-पत्र भी निकाला। उन्होंने जापानी भाषा भी सीख ली और इस भाषा में कुल 16 पुस्तकें लिखीं। उन्होंने हिन्दू धर्मग्रन्थ ‘रामायण’ का भी अनुवाद जापानी भाषा में किया।

21 जनवरी, 1945 को भारत माता के वीर सपूत रास बिहारी बोस का निधन हो गया। भारत को अंग्रेजी हुकुमत से मुक्ति दिलाने का सपना उनके लिए अधूरा रह गया। जापानी सरकार ने उन्हें ‘आर्डर आफ द राइजिंग सन’ के सम्मान से अलंकृत किया था। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में दिए गए योगदान के लिए क्रांतिकारी नेता रास बिहारी बोस को सदैव याद किया जायेगा। 


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